आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्


chalaki

वही चालाकी चालाकी है जिससे ईश्वर की प्राप्ति होती है – ‘सा चातुरी चातुरी ‘ –  रामकृष्ण परमहंस