आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

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aadi shakti maa vandevi dwara sheela devi ke haton bhiksha grahan

आदिशक्ति माँ वनदेवी द्वारा शीला देवी के हाथों भिक्षा ग्रहण

श्रीमती शीला देवी Sheela devi Amhara  और Sri Amarnath Tiwari अमरनाथ तिवारी दम्पत्ति माँ वनदेवी के उपासक हैं। 1990 के आसपास माँ वनदेवी की उपासना इन भक्तों ने अत्यंत तन्मयता से शुरू कर दी।
   यह घटना आज से 7-10 साल पहले की है। चैत्रदुर्गा के आसपास की यह बात है।  माँ वनदेवी एक वृद्ध महिला के रूप में आकर इनके हाथों भिक्षा ग्रहण करती हैं।
   मैली-कुचैली वृद्ध महिला का रूप धारण कर  शीला जी के घर आती हैं। माँ वनदेवी सांवली रूप में हैं। भिक्षा में बर्तन, खाने का सामान और पैसा मांगती हैं।
   शीला जी घर से खाने का सामान, बर्तन आदि दे देती हैं। पैसा उस समय इनकी जानकारी में नहीं रहती है। माँ वनदेवी यह सब ग्रहण कर वहां से हट जाती हैं।
  घर के अंदर जाने पर इन्हें पैसा रखा दिख जाता है। ये अपना सिर ठोकती हैं। हाय ! यह क्या हो गया? माँ की इच्छानुसार द्रव्य दे नहीं पाईं।
  तुरंत पैसा लेकर बाहर आती हैं। माँ को अगल-बगल ढ़ूंढती हैं। आसपास लोगों से पूछती हैं। पर माँ तब तक अदृश्य हो चुकी होती हैं।
  इस भक्त की भक्ति में और माँ वनदेवी का भक्त से यह प्रेम नारी शक्ति की शक्ति को सहज ही महान बनाती है।
  हम सब भी माँ से इन्हीं की तरह प्रेम करना सीखें और जीवन धन्य करें

जय माँ वनदेवी 🙏
✍ चन्द्रशेखर, अमहरा

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