आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

Devraha Lahri – 02 by Vyomesh prabhu

devraha-lahri-02

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jeevan ka darshan karnewala

दावा नहीं करता किंचित
सिर्फ मगन हो गाता है
बच्चन की ‘मधुशाला’ पर रीझा
‘अभिनव मधुशाला’ लाता है

जीवन का दर्शन करनेवाला
रचनाकार कहलाता है
विषम दुखी दग्ध हृदय को
आशा के नीर पिलाता है

तुलसी का हर पत्ता है गुणी
कवि अभिमान नहीं कर पाता है
साज के साथ आवाज देने हेतु
‘अभिनव मधुशाला’ की डुग्गी बजाता है