आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्


Satya

कोई विषय सत्य है या असत्य – यह जानने के लिए उसकी एकमात्र परीक्षा यही है, वह तुम्हें शारीरिक, मानसिक या आध्यात्मिक रुप से दुर्बल कर रहा है या नहीं, यदि कर रहा है तो उसका विषवत् त्याग कर दो, उसमें प्राण नहीं, वह कभी भी सत्य नहीं हो सकता! सत्य बलप्रद है, सत्य ही पवित्रता प्रदान करने वाला है, सत्य ही ज्ञानस्वरुप है – स्वामी विवेकानन्द

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Daivi jagat ki satta ehlok mein bhi chalti hai

दैवी जगत की सत्ता इहलोक में भी चलती है, परन्तु इहलोक का स्वरुप ही भ्रमात्मक होने के कारण उसमें सत्य के दैवी तत्व का अभाव है – महावतार बाबाजी (योगी कथामृत)