आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्


Aashirwaad From Patan Devi and Sadanand Baba

Ashirwaad from Patan Devi, Patna

Aashirwaad from Sadanand Baba, Sathni, Mathura


aashirwaad ki prakriya

आशीर्वाद :
जब भी कोई  मस्तक पर हाथ रखकर आशीर्वाद देता है, उस समय उस मनुष्य की कुन्डिलिनी  मुलाधार से जागकर सहस्रार तक आती है, पुन: मुलाधार तक जाती है, पुन: उसके हाथों की अंगूलियों से होते हुये  शक्ति प्रवाह जिस  मनुष्य के सर पर हाथ रखा होता है, उसके ब्रह्मरन्ध्र से होते हुये  मुलाधार में जाकर जमा हो जाती है। मनुष्यजब कभी भी साधना की तरफ बढता है, यह शक्ति मुलाधार से खुलकर आध्यात्मिक प्रगति में सहायता करती है। अत: आशीर्वाद  देने या लेने में कभी भी कन्जूसी नहीं करनी चाहिये।
शक्ति प्रवाह का सांसारिक परिस्थितियों के मध्य में क्षय होने से पहले सही जगह आशीर्वाद  के रुप में जमा कर दें जिससे किसी की आध्यात्मिक प्रगति हो।
अतएव आशीर्वाद देते व लेते रहें।