आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्


Daivi jagat ki satta ehlok mein bhi chalti hai

दैवी जगत की सत्ता इहलोक में भी चलती है, परन्तु इहलोक का स्वरुप ही भ्रमात्मक होने के कारण उसमें सत्य के दैवी तत्व का अभाव है – महावतार बाबाजी (योगी कथामृत)

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