आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्


दूर से भी दूर वे अति निकट उनका धाम जी – ईशावास्योपनिषद्

दूर से भी दूर वे अति निकट उनका धाम जी – ईशावास्योपनिषद्

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गति रहित परम व्यापक को ही सबसे गतिशील जान – ईशावास्योपनिषद्

गति रहित परम व्यापक को ही सबसे गतिशील जान – ईशावास्योपनिषद्