आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्


यहाँ माई की मौज है

Maa Peetambara
Maa Peetambara

यहाँ माई की मौज है – संत रमेशजी!

संत रमेशजी, दतिया
Sri Yantra Raj
Sri Yantra Raj

माँ की कृपा यहाँ सतत्  बरस रही है! आप यहाँ आकर माँ की कृपा पाकर धन्य हों! एक तरफ माँ पीताम्बरा मुक्तिप्रदायिनी हैं, वहीं माँ धूमावती शत्रु का संहार करती हैं, और वहीं श्रीयंत्रराज सर्वसुखप्रदायी हैं! इन तीनों का योग दतिया की धरती को पावन बना  रहे हैं! ऐसे में इस पावन तीर्थ पीताम्बरा पीठ में आकर नित्य भक्तजन धन्य हो रहे हैं! यहाँ माँ के ऐसे बेटे भी रहते हैं जो नित्य बारम्बार परिसर में घूम-घूमकर, ढूंढ-ढूंढ कर लोगों पर आशीर्वाद की वर्षा कर रहे हैं! भक्तों के फँसे गाठों को खोल रहे हैं! आगे का रास्ता बना रहे हैं! यह सब सहजता से माँ और दतिया स्वामी की कृपा से हो रहा है! माँ पीताम्बरा ऐसे भक्तों की इस देश में बाढ़ ला दें ताकि उनका प्रेम ऐसे भक्तों के माध्यम से हर किसी को ईश प्रेम की राह पर बढ़ा सकें!

जब ऐसी कृपा की बारिस दतिया की भूमि पर हो रही है तब आप सब कृतार्थ होते आगे बढ़ें! इस पवित्र पीठ में आप धन्य होने के लिये हीं आयें! जब माँ की कृपा बरस रही है तब अपने तुच्छ इच्छाओं को दरकिनार कर दें! आप के लिये माँ ने कुछ और हीं सोच रखा है! वो कुछ भी देंगी, आपकी बडी इच्छाओं से असंख्य गुना बड़ी और हितकर होंगी! अपनी सोच को यहाँ माँ पर छोड दें!

यहाँ माँ का दरबार है! परिसर में साधक नित्य अपनी अपनी साधना में लगे रहते हैं! उनका जाप आदि क्रियायें सहज ही मंदिर में आने वाले को दिखता है! यहाँ आने वालों का मेला लगा रहता है! पर जरा ध्यान दें – यहाँ मेला नहीं लगता है! नित्य माँ की कृपा छलक रही है! आप इसे पीने के लिये तैयार रहिये! आपका यहाँ मेला समझकर आना माँ के गोद में रहने वाले बच्चों को दु:खी करता है! जब आपको धन्य करने के लिये ये प्रेमी बेटे आगे हैं, तब आप भी अपने समझ को जरा ठीक कर लें और इन्हें दु:खी न करें! ये आपके हित में हमेशा आगे खड़े हैं! अपने पर होने वाले कृपा में अपने सोच से कमी न होने दें! यहाँ मेला या घूमने का जगह है, यह भाव न लेकर आयें! आप धन्य हों, यही माँ की इच्छा है, स्वामीजी की चाहत है एवं उनके पावन उद्देश्य में लगे संतों, सिद्धों की भी इच्छा है! अब आप जब भी आयें , अपने को ईश भाव में प्रगाढ़ होने की चाहत लेकर आयें!