आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

Anayas kumbhak aur om

अनायास कुम्भक की प्रक्रिया में ऊँ की भूमिका काफी अहम है! ऊँ को विभिन्न चक्र स्थानों से लेकर मस्तक भाग/सहस्त्रार में ले जाने का

भाव का आरोपण करें! इससे कुम्भक जल्द हीं परिपक्व हो जायेगा तथा इसकी अवधि काफी अधिक बढ़ जायेगी! कुम्भक हीं ईश्वर है! आप

कुम्भक को अपने जीवन में उतार लें! ईश्वर आप में उतरते चले जायेंगे!

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