आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

anayas-kumbhak/

अनायास कुम्भक ईश्वर को पाने, स्वयं में उतारने का सबसे सहज तरीका है! जिस तरह से अजपा जप को हम अपने में होते रहने का

आरोप करते हैं, इसी तरह अनायास कुम्भक को अपने जीवन में उतार लें! ऐसा होता है कि जब कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति आपके घर आता

है, तब आप अपना सुधबुध खो बैठते हैं! पता नहीं चलता क्या करें!

इसी तरह जब ईश्वर आपमें उतरने लगते हैं, तब शरीर धर्म का लोप होने लगता है! साँस बन्द हो जाता है!

अगर आप स्व में स्थित होना चाहते हैं, ईश्वर पाना चाहते हैं, स्व-साक्षात्कार होना चाहते हैं, अनायास कुम्भक करें!

जब भी कोई काम करते हैं तन्मय होकर, बोलते हैं धाराप्रवाह, कुम्भक की स्थिति आती है, कुछ समय ले लिये साँस का चलना बन्द हो जाता है, बस यही अनायास कुम्भक है!

आप बस जब यह होता है, यह भाव रखें, याद रखें, मन में यह सन्देश भेजें की कुम्भक की स्थिति बन रही है!

इस स्थिति में कुछ घन्टों, या कुछ दिनों के अभ्यास आप को कुम्भक की सहज स्थिति में लाकर रख देगा!

आप बस स्वयं में केन्द्रित होते चले जायेंगे और वह होगा जो जीवन को अपने लक्ष्य तक लाकर रख देगा!

बस आप अपने कुम्भक के होने समय स्वयं पर, होने पर केन्द्रति रहें!

प्रक्रिया: पहले आप सहायास कुम्भक से प्रारम्भ करें! फिर अनायास कुम्भक होने लगेगा!

Advertisements

Comments are closed.