आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

अपने आदर्श को जिंदा रखो

ऐसा होता है कि आप समकालिन परिस्थितियों के मद्देनजर अपने आदर्श के ऊपर दूसरों के विचारों को हावी होने देते हैं! वह आपको अच्छा लगने लगता

है! समय के साथ आप अपने आदर्श को इस तरह भूल जाते हैं! यह विडम्बना ही है कि बड़े-बड़े आदर्शों की बात करते करते अपने आपको इससे ऊपर

समझने लगते हैं! ऐसा लगने लगता है कि हमे अब इसकी आवश्यकता ही नही है! जीवन का सफर अब इसके बिना ही अच्छी तरीके से पूरा कर सकते हैं!

आपको ऐसे संगी भी मिल जाता है जो आपके हाँ में हाँ मिला देता है! ऐसे मित्रों से सावधान रहें! जीवन में चापलूस आपको अंधेरे में हीं धकेल सकते हैं!

जो स्वयं जैसा होगा उसी मार्ग पर अन्तत: ले जायेगा! अत: अपने जीवन में सत् चित् व्यक्तियों को हीं प्रश्रय दें जो अपने धन्य जीवन से आपको धन्य ही

करेगा! आपको समय-समय पर आपको अपने आदर्शों को याद दिलाकर सुमार्ग पर लाते रहेगा! अत: आप अपने आदर्श को जिंदा रखो!

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