आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

ईश्वर दर्शन के बाद समाधि होती है – श्रीरामकृष्ण परमहंस

श्रीरामकृष्ण – ईश्वर दर्शन होने का लक्षण है! समाधि होती है! समाधि पाँच प्रकार की होती है!

१) चींटी की गति – महावायु चींटी की तरह उठती है!

२) मछली की गति

३) तिर्यक गति

४) पक्षी की गति – जिस प्रकार पक्षी एक शाखा से दूसरी शाखा पर जाता है

५) कपिवत् या बन्दर की गति – मानो महावायु कूदकर माथे पर उठ गयी और समाधि हो गयी!

और भी दो प्रकार की समाधि है! एक – स्थित समाधि, एकदम बाह्यशून्य; बहुत देर तक, सम्भव है, कई दिनों तक रहे! और दूसरी – उन्मना समाधी, एकाएक मन को चारों ओर से

समेट कर ईश्वर में लगा देना!

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