आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

Sri Ramakrishna Vachanamrita

यह एक आदर्श किताब है श्रीरामकृष्ण परमहंसजी को जानने या समझने के लिये! उनके गृहस्थ शिष्य महेन्द्रनाथ गुप्त (श्री ‘म’) अपने घर जाने के बाद जो कुछ भी उनसे सुनकर आते

थे,  लिख लेते थे! आज यह परम ग्रंथ है श्रीरामकृष्ण परमहंस जी के उपदेशों को ग्रहण करने के लिये! एक बार पढ़ने के बाद आप स्वयं ही इसकी सार्थकता की गुनगान करने लगेंगे!

यह अवश्य ही आपके जीवन की दशा और दिशा को चलायमान कर देगी!

“जय श्रीरामकृष्ण”

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Sri “M” – Mahendra nath Gupta

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