आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

गुरु संगी के समान है – रामकृष्ण परमहंस

लाटु महाराज –  वे कहा करते थे – “गुरु संगी के समान है – हाथ पकड़कर ले जाते हैं; भगवान का दर्शन कराने के बाद ही वे शिष्य को छोड़ते हैं!”

सद्गुरु की कृपा से इष्टदर्शन होता है! सद्गुरु को पकड़कर रखो, वे ही तुम्हारे मन की सारी गड़बड़ी मिटा देंगे! उत्तम गुरु क्या करते हैं, जानते हो ? शिष्य के सामने इष्ट को रख देते

हैं! तदुपरान्त वे बैठे बैठे गुड़गुड़ी खींचते हैं और देखते रहते हैं कि शिष्य का मन किस प्रकार इष्ट की ओर बढ़ रहा है! जो उत्तम शिष्य है, वह तो सबकुछ त्यागकर केवल इष्ट का

स्मरण और उनकी सेवा करता रहता है!

latu maharaj

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