आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

jeevan dhanya ho jaaye

ईश्वर हमारे जीवन के हर पल में सुगन्ध बिखेर दें! हमारा जीवन उपवन की भाँति खिलखिला उठे! हमारा हाथ ईश्वर की हाथ में हो! चाहकर भी कोई इसे छुडा न सके! आनन्द के सागर में नित-दिन डूबकी लगे! सब धन्य हो जाये!

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