आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

Gayatri vidya peeth Pithair, Sathni

Sadanand swami

कठिन परिस्थितियों से जूझकर उसपर विजय प्राप्त करनी ही गायत्री की साधना  है – सदानन्द स्वामी

कठिन समय में साहस नहीं खोनी चाहिये!  माँ समय-समय पर परीक्षा लेते रहती है! ऐसे में दु:ख से विचलित नहीं हों! साधक का प्रारब्ध कर्म इससे कटता है! इन कष्टों के माध्यम से दैवी अनुग्रह की बारिश होती है! इसे अनुभवी साधक सहजता से देख लेते हैं! जब साधक का कार्य समाप्त हो जाता है, कोई कार्य शेष नहीं रहता तब शारीरिक कष्ट देकर उसकी आयु बढ़ा देते हैं ताकि अपने भक्त के माध्यम से ईश्वरीय लीला अधिक समय तक होता रहे, लोग ईश प्रेम में ऐसे भक्त के द्वारा सहजता से आगे बढ़ें! अगर धूल उड़ रही है तब आप मुँह फेर लें! चापलूस लोग से भी आप इसी तरह बच सकते हैं! चापलूसों को सटने का मौका न दें! यह साधना में अहित हीं पैदा करेंगे!

जीवन में दु:ख से घबराना नहीं चाहिये! साथ-हीं-साथ दु:ख को जानबूझ कर गले भी नहीं लगायें! अगर कोई संकल्प आप कर चुके हैं और संकल्प टूठा है, तब आप अपने जीवन के उमंग को धाराशायी न होने दें! कुछ समय के लिये अपने संकल्प को किनारे कर दें!  उमंग किसी भी कीमत पर न हटे! किसी के बल पर कोई कार्य का भार उठा लिये हैं, परिस्थिति विपरीत हो जाये, तब शुभ संकल्प को कुछ समय के लिये भूल जायें! आपके संकल्प समय आने पर जरुर पूर्ण हो जायेंगे! लेकिन जीवन में हताशा को स्थान नहीं देना है!

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