आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

समय रहते अपने संतान को मार्गदर्शित करें

बचपन में बच्चे अपने माँ को परिवार के सारे गृह-पूजा में आगे देखता है! विभिन्न त्योहारों पर माँ हीं पूजा के कार्यों को दक्षता  से करती चली आती हैं! बच्चे बस पूजा के पात्रों को असीम प्रेम से अपने नन्हें हाथों से सावधानीपूर्वक ले जाते हैं! माँ को  पूजा करते हुये देखकर काफी खुश होते हैं!

समय के साथ बच्चे जब बड़े होते हैं, पूजा-ध्यान-धारणा की तरफ अग्रसर होते हैं! संतान अपने माता-पिता के अधूरे या अतृप्त कार्यों को जाने-अनजाने पूरा करते हैं!

अब जबकि बच्चा बचपन से अपने परिवार में मातृ-पक्ष को ईश्वर-प्रेम में, पूजा-पाठ में, पवित्रता रखने में आगे पाता है, वही मातृ-पक्ष  को अपने लक्ष्य के बीच में बाधा के रुप में हर कदम पर पाता है! अगर जीवन की यही कडवी सच्चाई है, तब हे माता ! अपने बच्चे को यह  स्पष्ट रुप से समझाना या बतलाना अनिवार्य समझें कि यह कार्य बस आप माताओं का ही है! पुरुष-पक्ष या आपके पुत्र यह कार्य के लिये  नहीं बनें हैं! तब आपका पुत्र बचपन से अपने को इस से पृथक कर लेगा! आखिर जो शिक्षा आप अपने सन्तान को देंगे, वे वही तो आगे भी बरकरार रखेंगे!

अगर मातृ-पक्ष को यह बात अच्छी नहीं लगी, उन्हें लगता है कि उनका पुत्र भी इस कार्य को कर सकता है, तब उन माताओं के लिये यह परामर्श नहीं है! हाँ, उन माताओं के लिये अभी भी बरकरार है जो बाद में पुत्र को यह करते देख भला-बुरा कहना शुरु कर देते हैं!

आज समाज जिस दौर में है, अधिकांश लोग अपने सामाजिक परिवेश से दूर हीं रहते हैं! आप पर कोई सामाजिक रीति-नीति का कोई बोझ देने के लिये सिर पर खड़ा नहीं है! आप स्वतंत्र हैं!

अब उन बहनों और माताओं के लिये यह सन्देश है जो अपने पति को यह सब करते देख जल-भुन जाती हैं! लगता है कि उनका पति तो अब उनके काबिल हीं नहीं रहेगा! उसका उनके प्रति अब प्रेम अब खत्म हो जायेगा! क्या ऐसा भी होता है कि अपने बच्चे को प्रेम करेंगे तो पति से प्रेम कम हो जायेगा! अगर ऐसा है तब तो संतान एक अभिशाप हीं है! आप संतान न पैदा करें, बस पति-परायण रहें! क्या कहीं प्रेम कभी घृणा पैदा कर सकता है! आम के पेड़ से आम की हीं आशा की जाती है!

अगर ऐसा आपको लगता है तब आप एक कार्य अवश्य करें! यह कार्य आप को पुण्य प्रदान करने वाला है! अगली पीढ़ी आपको शुक्रिया अदा करेगा! अगर आपको आपके पति का ईश्वर प्रेम निर्रथक लगता है तब अपने सन्तान को बचपन  से यह ज्ञान-शिक्षा दें कि तेरे पिता तो रहे किसी काबिल! अगर तुझे संसार में सार्थक जीवन व्यतीत करनी है, तब इन सब के चक्कर से दुर हीं रहना! इन सब बाहियात काम के लिये हम मातायें हीं उपयुक्त हैं! हम हीं अपनी जीवन को इन बकवास के नाम पर कुर्बान करेंगी! बेटियाँ हीं भलीं हैं, इन पर बलि देने के लिये! तु तो मेरा लाड़ला है, क्यों अपना जीवन खराब करेगा!

बस यही सन्देश दें अपने पुत्रों को, अगर पूजा-पाठ इत्यादि बकवास है, कि हे मेरे वीर सपूत !! तू बस उन्हीं कार्यों को कर जो तूझे बतलाया जाये! हमें देख कर हमारा अनुशरण न कर, यह तो बस छलावा है, दिखावा है, बस घर-संसार की औपचारिकता मात्र है!

हमें नहीं लगता कि आपका यह संदेश आपका छोटा बस ग्रहण न कर सकेगा! अवश्य करेगा !! आप मात्र आगे बढ़ कर इसे समय रहते कर दें! बाद में आपका वह न सुनेगा! जो अपनी अन्तरात्मा की न सुन पाता है, भला आपकी कैसे सुन पायेगा! यही सही समय है, अगर लगता है कि आपका पति-प्रेम, पति की ईश्वर प्रेम ने चुरा लिया है, छीन लिया है, कमर कस कर
अपनी अगली पीढ़ी को आप ऐसा अनहोनी होने से बचा सकते हैं! बस आप अपने पुत्र को यह अवश्य बतला दें कि यह पूजा-पाठ बस बकवास है! तू हमारी देखा-देखी न कर! यह बस ऐसे हीं कर रहे हैं! अपने अन्दर यह सब मत उतार!

यह आपका प्रयास भावी पीढ़ी के लिये साक्षात वरदान प्रद है, रहेगा !

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