आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

आप ब्रह्म को प्राप्त हो जाओ!

नचिकेता को जब पता चला कि यमराज के पास उन्हें ब्रह्म ज्ञान मिल जायेगा, तब यमलोक यम के द्वार जा पहुँचे! यमराज उस समय यमलोक से बाहर किसी कार्यवश गये हुये थे! नचिकेता द्वार पर खड़े हो गये! कुछ दिन बाद [३ महीने] जब वापस आये तब उन्हें द्वार पर मानुष गन्ध तीव्रता से लगा! यह उन्हें अति असहनीय लग/हो रहा था! यमराज उन्हें द्वार से हट जाने को कहे ताकि अन्दर जा सकें!  नचिकेता वहाँ से नही हटे और अति नम्रता से अपने आने का प्रयोजन बताया! उन्हें ब्रह्मज्ञान देने को कहा! यमराज ने कहा कि यह शरीर रहते यह प्राप्त न होगा! यमराज कुछ और माँगने के लिये कहा! पर नचिकेता अपनी माँग पर डटे रहे! यमराज ने अन्त में कोई उपाय न देखक़र कहा कि – आप ब्रह्म को प्राप्त हो जाओ!

Advertisements

Comments are closed.