आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

जीवन क्या है समझूँ इसको, झरने सा झर जाऊँ

जीवन क्या है समझूँ इसको, झरने सा झर जाऊँ

जीवन क्या है समझूँ इसको, झरने सा झर जाऊँ

Advertisements

Comments are closed.