आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !


अखिलानन्दजी

अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !

समस्त विकल्पों का हो शीघ्र निवारण
अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !

काम नदी में विश्वास पादुका ले
चलूँ थल सा जल में
क्रोध मंजीरा बजे हाथों में
ईश विरह महसूसूँ हर पल में

ईर्ष्या पक्वान से करुँ ईश-कृपा का पारण
अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !

लोभ-सर्प को गले में लिपटाकर
मोह-गठरी प्रभु छवि में भूलाकर
मद की बारिश में नित्य नहाकर
अहंकार को परम ज्योति में समाकर

आत्म-प्रचार का हो त्याग अकारण
अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !

भक्ति भाव से स्वयं भरकर
मानवता की उच्च सीढ़ियाँ चढ़कर
जन-जन का तम-कलुष हर कर
उपकार का अहंकार बिसर कर

स्व भाव की प्रतिष्ठा का विस्तारण
अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !

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