आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

chalte raho, chalte raho

चलते रहो, चलते रहो…

चलते रहने वाले का सौभाग्य चल पड़ता है

चलता हुआ मनुष्य ही मधु पाता है

इसलिये चलते रहो, चलते रहो…

( ऐतरेय ब्राह्मण में इन्द्र एवं रोहिताश्व के बीच संवाद का सारांश)

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