आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

amiya sudha ras mist madhu

अनगिन वर्षों से कवि ने
अपने अन्दर संजोयी हाला
अमिय सुधा रस मिष्ट मधु
या फिर विष का  हो प्याला

आज सुदिन है माँ श्वेता ने
जड़ता जिह्वा की तोड़ी है
अब सजाएगा हर दिन कवि
अपनों के संग मधुशाला

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