आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

bhav ka abhav na ho

भाव का अभाव न हो
संकल्प जब मन में कर डाला
कोमल उदार मनोभावों से
हर श्वास में रची बसी हाला

चाह कब किसी की पूरी होती
पर होगी पूर्ण काव्य प्रिया

यौवन पायेगी सनातन जीवन लहरी
खरी उतरेगी ‘अभिनव मधुशाला’

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