आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

Desire of God

जिस तरह से हम ईश्वर से अपेक्षा रखते हैं वे भी हमसे अपेक्षा रखते हैं ।
ईश्वर विश्वात्मा के रुप में विद्यमान हैं ।
दूसरे की इच्छा  के अनुरुप अपनी इच्छा को ढालना अध्यात्म का ही एक स्वरुप है ।

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