आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

keep mind untouched from external factors

मन जब बाह्य प्रभावों से प्रभावित होना बन्द करता है, तब यह अपने में स्थित होने लगता है,मन अन्दर उतरने लगता है। क्रमश: एक-एक सीढियाँ उतरता हुआ आत्मा तक पहुँच जाता है। अत: अपने मन को बाहरी मन [प्रभाव/परिस्थिति] के प्रभाव में न आने दें। आप जब यह शुरु कर देंगे, तब यह मन दीप त्रिवेदी के अनुसार विभाजित  चौदह भाग में क्रमश: होता हुआ आत्मा तक पहुँच जाएगा ।

मन

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