आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

swa dharme nidhnam shreyah pardharmo bhayawah

स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:

जो अपने धर्म को त्याग कर दूसरे धर्म में शरण लेते हैं , उन्हें कम-से-कम नये धर्म के अच्छे  आचरण, व्यवहार व गुण ही ग्रहण करनी चाहिये। ऐसे लोग जो न अपने  धर्म के हो सके न ही दूसरे  धर्म के, ऐसे लोगों की गति बहुत हीं भयावह होती है।
अध्यात्म में 95% ऐसे ही लोगों की सख्या है जो दूसरे को कष्ट पहुचाने में अपना पुरुषार्थ समझते हैं। अध्यात्म को  ऐसे लोग बदनाम कर दिये  हैं। ईश्वर ऐसे लोगों को सदमार्ग पर ले चलें, ऐसी प्रार्थना है।

इन महापुरुष से हमें अच्छे आचरण व व्यवहार की ही अपेक्षा है।

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