आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

Grihastha

सच्चा गृहस्थ साधू से बड़ा होता है। वह दो धर्म निभाता है – एक  साधू  धर्म , दूसरा गृहस्थ धर्म । जबकि साधू  सिर्फ एक धर्म निभाता है ।

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