आनन्दधारा आध्यात्मिक मंच एवं वार्षिक पत्रिका

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्द:खभाग्भवेत्

make life enlightened

अंधकार कितना भी विस्तृत एवं सघन क्यों न हो, दीपक की एक बाती उसे ललकारती है। परिस्थितियों की विषमता देखकर सृजन के मुख पर मलिनता क्यों ?

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