Category: Anand Dhara


दो प्रकार के लोग ईश्वर की मनुष्य रुप में उपासना नहीं करते – स्वामी विवेकानन्द

हमें आत्मा की प्राप्ति नहीं करनी है, वह तो हमारा प्रकृत रुप ही है – स्वामी विवेकानन्द ( दे‌ववाणी)

आप ही पुराण पुरुष, विश्व के हैं कारण रुप

हर भवन में डेरा कवि का, कवि हर घडी पीनेवाला

ईश्वर हमारे जीवन के हर पल में सुगन्ध बिखेर दें! हमारा जीवन उपवन की भाँति खिलखिला उठे! हमारा हाथ ईश्वर की हाथ में हो! चाहकर भी कोई इसे छुडा न सके! आनन्द के सागर में नित-दिन डूबकी लगे! सब धन्य हो जाये!

सतत् ध्यान का पक्षधर है कवि

Maa Peetambara

Maa Peetambara

 

दतिया में आज पीताम्बरा जयंती मनाई जा रही है! सबको बहुत सारी बधाईयाँ! आनन्दधारा मंच वैशाख शुक्लपक्ष चतुर्थी से लेकर वैशाख शुक्लपक्ष अष्टमी तक यह पावन जयंती मनाती है!माँ के आविर्भाव दिवस की शुभता तीन दिन पहले से ही प्रकट होने लगती है! सबको एक बार फिर ढेर सारी बधाईयाँ!

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