Category: Anand Dhara
हमें आत्मा की प्राप्ति नहीं करनी है, वह तो हमारा प्रकृत रुप ही है – स्वामी विवेकानन्द ( देववाणी)
ईश्वर हमारे जीवन के हर पल में सुगन्ध बिखेर दें! हमारा जीवन उपवन की भाँति खिलखिला उठे! हमारा हाथ ईश्वर की हाथ में हो! चाहकर भी कोई इसे छुडा न सके! आनन्द के सागर में नित-दिन डूबकी लगे! सब धन्य हो जाये!














