Archive for December, 2011


अभिनव मधुशाला - २८

अभिनव मधुशाला - २८

माधुर्य

माधुर्य

अभिनव मधुशाला - २७

अभिनव मधुशाला - २७

अभिनव मधुशाला - २६

अभिनव मधुशाला - २६

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
यह डूब गया तो डूब गया

अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गयी सो बात गयी

जीवन में वह था एक कुसुम
थे उस पर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुवन की छाती को देखो
सूखी इसकी कितनी कलियाँ
मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ
जो मुरझाईं फिर कहाँ खिलीं
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है
जो बीत गयी सो बात गयी

जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिटटी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठते हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गयी सो बात गयी

मृदु मिटटी के हैं बने हुए
मधुघट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन लेकर आयें हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फिर भी मदिरालय के अंदर
मधु के घट हैं मधुप्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता चिल्लाता है
जो बीत गयी सो बात गयी

 - हरिवंशराय बच्चन

काया की तिजोरी में बन्द एक अनमोल खजाना

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