अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !
समस्त विकल्पों का हो शीघ्र निवारण
अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !
काम नदी में विश्वास पादुका ले
चलूँ थल सा जल में
क्रोध मंजीरा बजे हाथों में
ईश विरह महसूसूँ हर पल में
ईर्ष्या पक्वान से करुँ ईश-कृपा का पारण
अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !
लोभ-सर्प को गले में लिपटाकर
मोह-गठरी प्रभु छवि में भूलाकर
मद की बारिश में नित्य नहाकर
अहंकार को परम ज्योति में समाकर
आत्म-प्रचार का हो त्याग अकारण
अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !
भक्ति भाव से स्वयं भरकर
मानवता की उच्च सीढ़ियाँ चढ़कर
जन-जन का तम-कलुष हर कर
उपकार का अहंकार बिसर कर
स्व भाव की प्रतिष्ठा का विस्तारण
अखिलानन्द चरण को हृदय में करुँ मैं धारण !






