भाव का अभाव न हो
संकल्प जब मन में कर डाला
कोमल उदार मनोभावों से
हर श्वास में रची बसी हाला

चाह कब किसी की पूरी होती
पर होगी पूर्ण काव्य प्रिया

यौवन पायेगी सनातन जीवन लहरी
खरी उतरेगी ‘अभिनव मधुशाला’