दावा नहीं करता किंचित
सिर्फ मगन हो गाता है
बच्चन की ‘मधुशाला’ पर रीझा
‘अभिनव मधुशाला’ लाता है
जीवन का दर्शन करनेवाला
रचनाकार कहलाता है
विषम दुखी दग्ध हृदय को
आशा के नीर पिलाता है
तुलसी का हर पत्ता है गुणी
कवि अभिमान नहीं कर पाता है
साज के साथ आवाज देने हेतु
‘अभिनव मधुशाला’ की डुग्गी बजाता है





